मेरी फितरत नही मै इश्क को बदना

 

मेरे महबूब ने गम देके रुलाया है मुझे
आज ये बात मैं लोगो मैं लोगों में सरे आम करू।
जी चाहता है कि, महफ़िल में उसे करूँ रुस्वा
पर मेरी फितरत नही के इश्क को बाजार में नीलाम करूँ।

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