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Showing posts from 2020

बुझे दिल मे फिर रौशनी जल उठी

  दिली दिल मे रौशन हुए जा रहे है। फकत देख ले मुड़ के फिर ओ दोबारा। बुझे दिल मे फिर रौशनी जल उठी तब। उसने मुस्का के जब प्यार का दीप बारा।

मेनहत से दुनिया झुका के देखा कर।

अपनी औकात से आगे तू ख्वाब देखा कर। नशीबा को ठोकर लगा के देख कर। कहते है किस्मत में लिखा सब को मिलता है तू अपनी मेनहत से दुनिया झुका के देखा कर।

मेरी बाहों में लिपट जाओगे।

 वक़्त की आगोश में यूँ सिमट जाओगे। मेरा दिल तोड़ कर यूँ मुस्कुराने वाले। जिस दिन दिल तुम्हारा टूटेगा कभी भी। सच में आके मेरी बाहों में लिपट जाओगे।

ये पावँ में पायल गर दिखाना नही तो बजाना किसके लिए

 ये पावँ में पायल गर दिखाना नही तो बजाना किसके लिए इतने शरीफ हो तो मेरी गली से ये हर रोज आना जाना किसके लिए कहते हो इश्क नही हम नफरत करते हो तुम हमसे  फिर ख्वाब में हर रोज आके मुझे जगाना किसके लिए

मेरी फितरत नही मै इश्क को बदना

  मेरे महबूब ने गम देके रुलाया है मुझे आज ये बात मैं लोगो मैं लोगों में सरे आम करू। जी चाहता है कि, महफ़िल में उसे करूँ रुस्वा पर मेरी फितरत नही के इश्क को बाजार में नीलाम करूँ।

लरजते होंठो से यूँ तेरा मुझे बुलाना

 अच्छा लगता है, यूँ सर्दियों के मौसम मे धूप का खिल जाना , तनहाई में छुपके से तेरी याद में खो जाना   मायूशियो में मुझे देख कर तेरा मुस्कराना  दुनिया छोड़ तेरे कंधे पे सर रख के सो जाना मुझे अच्छा लगता है। लरजते होंठो से यूँ तेरा मुझे बुलाना  पलक को तितलियों के पंख सा  उड़ाना इसारे करके मुझे फिर यूँ मुस्कराना अनकहे लब्जों से मुझे प्यार से बुलाना मुझे अच्छा लगता है। तेरा खिडकियों से झाँक कर जाना मुझे अच्छा लगता है।

इश्क की राह पे चल कर गुजर गए जो भी

इश्क की राह पे चल कर गुजर गए जो भी उन सभी आशिको के पांव में छाला होगा। जो किसी की यादो में डूब के खुश रहते है। उन्हें इश्क ने खुद अपनी आगोश में पला होगा

जा छोड़ दिया तेरी गलियों में आना जाना तेरी बात पर

 जा छोड़ दिया तेरी गलियों में आना जाना तेरी बात पर पर बेवफा नाम मत देना लौट कर आना पड़ेगा तुझे मेरे पास इश्क में वादा है मेरा पर आकर मुझे कोई इल्जाम मत देना

गर हाथ पे हाथ धरे बैठे तो अगली बहन तुम्हारी है।

 निर्भयता के गलियारे में जो घूम रहे बलात्कारी है। है सत्ता के दामाद यही प्रशाशन की रिस्तेदारी है। हे निर्ल्लज मानवजागो तुम,सोचो मत ओ बेचारी है। गर हाथ पे हाथ धरे बैठे,तो अगली बहन तुम्हारी है। ये जुल्मी और दरिंदो है,ये हब्सी खुले परिंदो है। ये आकाओ की बाते सुन के नशे में इतने अंधे है। लूट मार बलात्कार ये सब इनके पुस्तैनी धंधे है। अभी ना होश तुम्हे आया क्या मती तुम्हारी मारी है। गर हाथ पे हाथ धरे बैठे तो अगली बहन तुम्हारी है।  बैठो मत कुछ बोलो तुम, अपनी आँखें खोलो तुम।  लुटी आबरू  बहना की, खून की होली खेलो तुम बाज नहीं ओ आये तो गोली की बोली बोलो तुम। घर से नहीं निकलते क्यूँ हाथों में चूड़ी सजा ली है। गर हाथ पे हाथ धरे बैठे तो अगली बहन तुम्हारी है। हम न्याय, दिला नहीं पाए कहतें हो हम शर्मिंदा है। क्या लहू में तेरे पानी है, गर नहीं तो ओ,क्यूँ जिन्दा है। शासन प्रशासन की छोड़ो यहाँ मानवता ही अँधा है। कोई न्याय दिलाएगा नेता ये भ्रम क्यूँ तुमने पाली है गर हाथ पे हाथ धरे बैठे तो अगली बहन तुम्हारी है।  मंत्री का हो या नेता हो या पूंजीपती का बेटा हो बलात्कारी को फांसी दो चाह...

मौसम का रुख देख कर, दिल का बसेरा बदलना मेरी फितरत नहीं।

 मौसम का रुख देख कर, दिल का बसेरा बदलना मेरी फितरत नहीं। हम ओ आशिक हैं जो , पतझड़ में भी उसी टहनी पे घोसला रखते है,जहाँ हरे कभी हरे भरे पत्तो की छाया हुआ करता था

जिंदगी में कुछ चीजें बिना देर किये हासिल कर लेनी चाहिये

 जिंदगी में कुछ चीजें बिना देर किये हासिल कर लेनी चाहिये चाहे उसकी कीमत कुछ भी हो। सपनो की मंजिल,सपनो की रानी और जिसके जिंदगी के हम सपने है उनका प्यार माँ-बाप

पर मेरे हाथों में न इश्क की कोई रेखा है।

 हमने मौसम को ही अक्सर बदलते देखा है। कली को रोज ही गुलशन में खिलते देखा है। आखिरी आस थी तुमसे के इश्क हो शायद। पर मेरे हाथों में न इश्क की कोई रेखा है।

यूँ तो बुझाने की कोशिश मुझे हवाओ ने भी कम न की

 यूँ तो बुझाने की कोशिश मुझे हवाओ ने भी कम न की  पर हम भी चराग थे उम्मीद के उससे आक्सीजन लेकर और भी जलते रहे
 आज ना जाने क्यों बड़ा दिलकश नज़ारा है। लगता है आज उसने मुझे फिर से पुकारा है। सांसे थम थम के चलती थी उनके अहसास बिन लगता है अपने दिल  के आंगन में  उसने फिर  मुझे  उतारा है

एक उसकी बेवफाई ही है जो मुझे कभी समझ में न आयी

 आशिकी का कोई पन्ना नहीं जिसे मैंने पढ़ा ना हो एक उसकी बेवफाई ही है जो मुझे कभी समझ में न आयी

हौसला तो आसमान से भी ऊपर उठने का है मुझमे

 हौसला तो आसमान से भी ऊपर उठने का है मुझमे पर पर्बतों सा अकड़ रखने के शौक नहीं पालते हम

मुझे क्या पता उसी के हाथों मेरा कत्ले आम होगा

 गमे जिंदगी का तमाशा सरेआम होगा आज फिर कोई इस महफ़िल में बदनाम होगा हमसफ़र समझ मै दिल लगा बैठा जिनसे मुझे क्या पता उसी के हाथों मेरा कत्ले आम होगा

उसका हर शाम बिस्तर बदलने का काम आज भी है

 उन बदनाम गलियों में मेरा नाम आज भी है। मेरे सर पे बेवफाई का इल्जाम आज भी है हम तो आशिक थे यारो दिल दे बैठे उसे, तब पता चला उसका हर शाम बिस्तर बदलने का काम आज भी है

पर मेरे जीने की चाहत सिर्फ तुम हो

  मेरे ख्वाबो की हकीकत सिर्फ तुम हो मेरा चैनों सकूँ दिल की रहत सिर्फ तुम हो सुना है धड़कनो के चलने से लोग जीते है पर मेरे जीने की चाहत सिर्फ तुम हो

दुनिया में दर्द की दवा तो मिल जाती है पर दरारे मिटा सके ऐसी कोई दवा नहीं

  दिल के रिस्ते में दर्द भरे शब्द बेशक बोलो पर दरार भरे शब्द गलती से भी नहीं बोलना   क्यूकि इतिहास गवाह है दुनिया में दर्द की दवा तो मिल जाती है पर दरारे मिटा सके ऐसी कोई दवा नहीं

जुदाई से दम तोड़ दे मेरा इश्क इतना बादनाशीबी नहीं

 जो नशीब मे था ओ  मेरा नशीब नहीं। मैं जिसका हबीब था आज ओ करीब नहीं। जुदाई का मिला सौगात इश्क में हम दोनों को। पर जुदाई से दम तोड़ दे मेरा इश्क इतना बादनाशीबी नहीं

डॉक्टर बन गया हूं मैं जब से तुमसे इश्क हुवा

 डॉक्टर बन गया हूं मैं जब से तुमसे इश्क हुवा अपनी जिंदगी का ठिकाना नहीं रहा पर  अपनी धड़कनो को आला समझ  तेरी खैरियत जनता रहता हूँ

: एक पल में इतनी नफरत

Notes Tec: एक पल में इतनी नफरत : एक पल में इतनी नफरत कैसे कर लेती हो तुम। हम तो जिसे अपना मान ले उसे गुस्सा भी उसी के ख्यालों में डूब के करते है।

एक पल में इतनी नफरत

एक पल में इतनी नफरत कैसे कर लेती हो तुम। हम तो जिसे अपना मान ले उसे गुस्सा भी उसी के ख्यालों में डूब के करते है।