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Showing posts from February, 2021

जीने का सलीका है बेटी।

 बाबुल के आंगन में ,काजल का टीका है बेटी। भैया के हाथों मे सजी, राखी का फीता है बेटी। मैया के नित आँचल में फूलों सी महकती है बेटी। गौर से देखा जाए तो जीने का सलीका है बेटी।

मुझसे पहली बार इश्क की चाहत उनकी अधूरी रही।

 मुझसे पहली बार इश्क की चाहत उनकी अधूरी रही। ओ जितना पास आना चाहे हर बार उतनी दूरी रही। जमाने की ठोकरों ने उस मोड़ पर लाकर छोड़ा है मुझे ओ बांहे फैलाये रहे मेरी किसी और संग रात बिताने की मजबूरी रही

इश्क का जाम मैं पीने पिलाने निकला हूँ।

रंजिसोगम के तराजू में न यूँ तौलो मुझे। कोई काफिर नही मैं हूँ यहाँ जमाने मे। इश्क का जाम मैं पीने पिलाने निकला हूँ। गर जुर्म है तो दबा दो मुझे शवखाने में।

ऐ जिंदगी कर मुक्कमल मुझे।

ऐ जिंदगी कर मुक्कमल मुझे। सर्द जीवन की राहे दे कम्बल मुझे-2 जब चला बाट पर हर पथिक ने मुझे। ताने के पत्थरों से है घायल किया। टूट कर रूठ कर रुक गयी जिंदगी। लड़ने का मुझको साहस ये दंगल तू दे। ऐ जिंदगी कर मुक्कमल मुझे। सर्द जीवन की राहे दे कम्बल मुझे-2 दिन महीने बरस, आँखे बरसीं बहुत। तेरे दीदार को जान ताड़फे बहुत। ग्रंथो का बुनके कंगन संजोये है जो। हाथो में अब सजाने ये कंगन तू दे। ऐ जिंदगी कर मुक्कमल मुझे। सर्द जीवन की राहे दे कम्बल मुझे-2 इतना ढूँढा तुझे मुझको रब मिल गया। एक तेरे सिवा मुझको सब मिल गया। मैं भी घायल दीवाना तेरा हूँ प्रिये। रहम कर, अब तो अपना बना ले मुझे। ऐ जिंदगी कर मुक्कमल मुझे। सर्द जीवन की राहे दे कम्बल मुझे-2 मंजिले इश्क़ का था नाश जिश्म में। दर्द सहता रहा आगे बढ़ता रहा। लड़खड़ाए और मैं गिर पड़ा। होश आया तो था तेरी आगोश में। ऐ जिंदगी कर मुक्कमल मुझे। सर्द जीवन की राहे दे कम्बल मुझे-2

रोटी की जंग है, हर किसान दंग है।

 रोटी की जंग है, हर किसान दंग है। देश के दर्दे जिगर में दर्द ये प्रचंड है। सरकार साहूकार तिल-तिल बेचता हर अंग है। कभी बेटियां था बेचता, अब बेचता है रोटियां । गंगा तिरंगा बेच देगा,जो हैं वतन की चोटियां मां मेरी चिंता में है, बेटा पिया क्या भांग है। रोटी की जंग है, हर किसान दंग है। देश के दर्दे जिगर में दर्द ये प्रचंड है। अखण्डता की बात कर ,है खंडो में तोड़ता। तिरंगे की शान को है इस तरह ये रौंदता। भगवा का भड़वा है,ये राज ये ना खोलता। चीखे किसानों की ये सुन, बजाता मृदंग है। रोटी की जंग है, हर किसान दंग है। देश के दर्दे जिगर में दर्द ये प्रचंड है । देश की आवाज है जो बिक चुकी है मीडिया। बोली लगाकर बेचने पर,दे रहे सब आईडिया आम जन हैरान है कि, हाय हमने क्या किया। इसकी चौकीदारी में देखो ,राजा ही अपँग है। रोटी की जंग है हर किसान दंग है। देश के दर्दे जिगर में दर्द ये प्रचंड है।