एक पल में इतनी नफरत, कैसे कर लेती हो तुम।
मै कहती हूँ दूर हो जाओ मेरी नजरों से,मुझे तुम्हारी सूरत से भी नफरत है।
एक पल में इतनी नफरत, कैसे कर लेती हो तुम।
एक पल में इतनी नफरत, कैसे कर लेती हो तुम।
हम तो जिसे अपना मान ले, उससे गुस्सा भी
उसी के ख्यालों में डूब के करते है।
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