ऐ जिंदगी कर मुक्कमल मुझे।

ऐ जिंदगी कर मुक्कमल मुझे।

सर्द जीवन की राहे दे कम्बल मुझे-2

जब चला बाट पर हर पथिक ने मुझे।

ताने के पत्थरों से है घायल किया।

टूट कर रूठ कर रुक गयी जिंदगी।

लड़ने का मुझको साहस ये दंगल तू दे।

ऐ जिंदगी कर मुक्कमल मुझे।

सर्द जीवन की राहे दे कम्बल मुझे-2

दिन महीने बरस, आँखे बरसीं बहुत।

तेरे दीदार को जान ताड़फे बहुत।

ग्रंथो का बुनके कंगन संजोये है जो।

हाथो में अब सजाने ये कंगन तू दे।

ऐ जिंदगी कर मुक्कमल मुझे।

सर्द जीवन की राहे दे कम्बल मुझे-2

इतना ढूँढा तुझे मुझको रब मिल गया।

एक तेरे सिवा मुझको सब मिल गया।

मैं भी घायल दीवाना तेरा हूँ प्रिये।

रहम कर, अब तो अपना बना ले मुझे।

ऐ जिंदगी कर मुक्कमल मुझे।

सर्द जीवन की राहे दे कम्बल मुझे-2

मंजिले इश्क़ का था नाश जिश्म में।

दर्द सहता रहा आगे बढ़ता रहा।

लड़खड़ाए और मैं गिर पड़ा।

होश आया तो था तेरी आगोश में।

ऐ जिंदगी कर मुक्कमल मुझे।

सर्द जीवन की राहे दे कम्बल मुझे-2

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