रोटी की जंग है, हर किसान दंग है।

 रोटी की जंग है, हर किसान दंग है।

देश के दर्दे जिगर में दर्द ये प्रचंड है।

सरकार साहूकार तिल-तिल बेचता हर अंग है।

कभी बेटियां था बेचता, अब बेचता है रोटियां ।

गंगा तिरंगा बेच देगा,जो हैं वतन की चोटियां

मां मेरी चिंता में है, बेटा पिया क्या भांग है।

रोटी की जंग है, हर किसान दंग है।

देश के दर्दे जिगर में दर्द ये प्रचंड है।

अखण्डता की बात कर ,है खंडो में तोड़ता।

तिरंगे की शान को है इस तरह ये रौंदता।

भगवा का भड़वा है,ये राज ये ना खोलता।

चीखे किसानों की ये सुन, बजाता मृदंग है।

रोटी की जंग है, हर किसान दंग है।

देश के दर्दे जिगर में दर्द ये प्रचंड है ।

देश की आवाज है जो बिक चुकी है मीडिया।

बोली लगाकर बेचने पर,दे रहे सब आईडिया

आम जन हैरान है कि, हाय हमने क्या किया।

इसकी चौकीदारी में देखो ,राजा ही अपँग है।

रोटी की जंग है हर किसान दंग है।

देश के दर्दे जिगर में दर्द ये प्रचंड है।

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