पर मेरे हाथों में न इश्क की कोई रेखा है। Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps October 03, 2020 हमने मौसम को ही अक्सर बदलते देखा है।कली को रोज ही गुलशन में खिलते देखा है।आखिरी आस थी तुमसे के इश्क हो शायद।पर मेरे हाथों में न इश्क की कोई रेखा है। Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
एक पल में इतनी नफरत July 05, 2020 एक पल में इतनी नफरत कैसे कर लेती हो तुम। हम तो जिसे अपना मान ले उसे गुस्सा भी उसी के ख्यालों में डूब के करते है। Read more
मेरी फितरत नही मै इश्क को बदना November 24, 2020 मेरे महबूब ने गम देके रुलाया है मुझे आज ये बात मैं लोगो मैं लोगों में सरे आम करू। जी चाहता है कि, महफ़िल में उसे करूँ रुस्वा पर मेरी फितरत नही के इश्क को बाजार में नीलाम करूँ। Read more
हौसला तो आसमान से भी ऊपर उठने का है मुझमे October 02, 2020 हौसला तो आसमान से भी ऊपर उठने का है मुझमे पर पर्बतों सा अकड़ रखने के शौक नहीं पालते हम Read more
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