गर हाथ पे हाथ धरे बैठे तो अगली बहन तुम्हारी है।

 निर्भयता के गलियारे में जो घूम रहे बलात्कारी है।

है सत्ता के दामाद यही प्रशाशन की रिस्तेदारी है।

हे निर्ल्लज मानवजागो तुम,सोचो मत ओ बेचारी है।

गर हाथ पे हाथ धरे बैठे,तो अगली बहन तुम्हारी है।

ये जुल्मी और दरिंदो है,ये हब्सी खुले परिंदो है।

ये आकाओ की बाते सुन के नशे में इतने अंधे है।

लूट मार बलात्कार ये सब इनके पुस्तैनी धंधे है।

अभी ना होश तुम्हे आया क्या मती तुम्हारी मारी है।

गर हाथ पे हाथ धरे बैठे तो अगली बहन तुम्हारी है।

 बैठो मत कुछ बोलो तुम, अपनी आँखें खोलो तुम।

 लुटी आबरू  बहना की, खून की होली खेलो तुम

बाज नहीं ओ आये तो गोली की बोली बोलो तुम।

घर से नहीं निकलते क्यूँ हाथों में चूड़ी सजा ली है।

गर हाथ पे हाथ धरे बैठे तो अगली बहन तुम्हारी है।

हम न्याय, दिला नहीं पाए कहतें हो हम शर्मिंदा है।

क्या लहू में तेरे पानी है, गर नहीं तो ओ,क्यूँ जिन्दा है।

शासन प्रशासन की छोड़ो यहाँ मानवता ही अँधा है।

कोई न्याय दिलाएगा नेता ये भ्रम क्यूँ तुमने पाली है

गर हाथ पे हाथ धरे बैठे तो अगली बहन तुम्हारी है।

 मंत्री का हो या नेता हो या पूंजीपती का बेटा हो

बलात्कारी को फांसी दो चाहे ओ राष्ट्र विजेता हो।

बहनो की रक्ष। करने की अब अपनी जिम्मेदारी है।

तड़प तड़प कर सामने ही ओ कैसे मरी दुलारी है।

गर हाथ पे हाxxथ धरे बैठे तो अगली बहन तुम्हारी है।



Comments

Popular posts from this blog

मेरी फितरत नही मै इश्क को बदना