मौसम का रुख देख कर, दिल का बसेरा बदलना मेरी फितरत नहीं।

 मौसम का रुख देख कर, दिल का बसेरा बदलना मेरी फितरत नहीं।

हम ओ आशिक हैं जो ,

पतझड़ में भी उसी टहनी पे घोसला रखते है,जहाँ हरे कभी हरे भरे पत्तो की छाया हुआ करता था


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मेरी फितरत नही मै इश्क को बदना